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शुक्रवार, 24 अक्तूबर 2008



राम वनवास का सीधा प्रसारण


प्रेम जनमेजय




आम चुनाव आने को हैं, सबसे बड़ा मुद्दा है-चुनावी मुद्दे की खोज। इधर राम पर भी खोज जारी है। जैसे चुनाव आते ही जनसेवकों का आम आदमी की ओर ध्यान आकर्षित होता है, वैसे ही राम की ओर भी होता है। इस बार राम मुद्दा दे रहे हैं कि राम सेतु था कि नहीं। था और नहीं की बहस जारी है। मैं भी एक मुद्दा दे रहा हूं- राम के समय दूरदर्शन था कि नहीं । मैं कहता हूं, था। आप ये तो मानेंगें ही कि जब-तब कोई न कोई आकाशवाणी का प्रयोग करता रहता था। अब जहां आकाशवाणी होगी वहां दूरदर्शन न होगा? इस था और नही पर आप चाहें तो मुझे एस एम एस करके बता सकते हैं। कल्पना करने में क्या जाता है, जब आप बरसों से देश से गरीबी हटने की कल्पना को सच माने बैठे हैं तो मुझ शेखचिल्ली के साथ यह कल्पना भी कर डालिए और कुछ दृश्य
भी देख डालिए


दृश्य- 1कल राम का राजतिलक है। सभी चैनल सरकारी चैनल का प्रसारण रिले कर रहे है । सुबह से शहनाई बजा रहे है, राम के बचपन से आज तक की बार बार फुटेज दिखाई जा चुकी हैं। कार्यक्रमों में कोई सनसनी नहीं है,व्यूरशिप कम है इसलिए विज्ञापन भी नहीं है। अचानक रात बारह बजे सभी चैनल सोते से जाग जाते हैं। हर चैनल पर ब्रेकिंग न्यूज है- राम को चैदह बरस का बनवास। समस्त अयोध्या भी सोते से जग गई है। पान और चाय की दुकाने खुल गई है। ढाबे सज गए है। कुछ चैनल सनसनी खेज खुलासा कर के सनसनी फैला रहे हैं-देखिए सनसनीखेज खुलासा कैसे एक सौतेली मां ने किया अत्याचार। जो बेटा उसे अपनी मां से बढ़कर मानता था उसी मां ने दिया उसे चैदह बरस का बनवास। अयोध्या के इतिहास में ऐसा न कभी घटा और न कभी घटेगा। अपने पुत्र भरत के लिए ऐशोआराम और वो राम जो कल राजा बनने जा रहे थे उनके लिए चैदह बरस का बनवास। हम आपको दिखाने जा रहे हैं सनसनी खेज खुलासा कि कैसे हुआ राम को यह बनवास। जाईएगा नहीं, ब्रेक के बाद हम आपको दिखाएंगे कैकेयी की वो चाल जिसने पलट कर रख दी दशरथ की बाजी।’ इसके बाद ब्रेक इतना लंबा होता है कि सनसनी का बल्ड प्रेशर लो होने लगता है।
दृश्य-2कुछ चैनल्स ने विशेषज्ञों को अपने चैनल में बुला लिया है। विशेषज्ञों का मुकाबला चल रहा है जो किसी डब्ल्यू डब्लयू एफ से कम नही है। आप भी इस मुकाबले का आनंद लें।-- हमारा दल मानता है कि ऐसा अयोध्या के इतिहास में पहले कभी घटा नहीं है।-- हमारा दल मानता है कि ऐसा अयोध्या में घटा है पर उसके प्रमाण नहीं मिलते हैं।-- कब घटा है? आपके पास क्या प्रमाण हैं? -- जब भी घटा ह,ै घटा है। प्रमाण समय आने पर देंगें।-मै कहता हूं नहीं घटा है++...मैं कहता हूं घटा है। और इसके बाद खूब मैं मैं चलती है तो संचालक तीसरे की ओर रुख कर के कहता है-- आपका दल इस बारे में क्या कहता है?-- हमारा दल इंतजार करेगा कि कौन सत्ता में आता है,
राम या भरत।
दृश्य 3इस बीच एक और ब्रेकिंग न्यूज आती है- अभी अभी हमें समाचार मिला है कि सीता के लिए भी वनवास के वस्त्र रात को एक दुकान खुलवा कर लिए गए हैं। चलिए हम उस दूकानदार से बात करते हैं जिसके यहां से यह वस्त्र लिए गए हैं।-आपका नाम?-मेरा नाम हरीशचंदर है जी।-आप क्या करते हैं- जी मैं रिषी मुनियों को कपड़े बेचता हूं। - आपकी दूकान पर केवल रिषी मुनि ही कपड़े लेने आते हैं?- हां जी-और कोई नहीं आता?-न जी।-और कोई क्यों नहीं आता ?- पता नहीं जी।-- आप झूठ बोल रहे हैं, आपको सब पता है।-- पता नहीं जी।- आपको पता है, आपके यहां से ही कपड़े गए है किसी महिला के लिए । हमारे पास इसकी वीडियो है हमें सब पता है, - जब आपको सब पता है तो मुझसे क्यों पूछ रहे हो। तो आपने देखा महलों का आतंक हम अभी कुछ देर में आपको वह वीडियो दिखाने जा रहे हैं जो ख्ुालासा कर देगी कि वो कपड़े सीता के लिए ही गए हैं। हमारी टीम उस डिजाईनर की खोज कर रही हैं और उस प्रसाधन केंद्र का भी पता कर रही है जहां सीता जी वनवास के लिए सजने गई थीं।आप हमें एस एम एस करें कि क्या राम अकेले बनवास जाएंगे ? यदि आपका जवाब हंा है तो हां लिखें, न है तो नं लिखें ओर कुछ भी जवाब न हो तो भी आप लिखें ‘कुछ नहीं’ । हमारे चैनल ने पहली बार ऐसे लोगेंा को भी सुअवसर दिया है जिनका जवाब ‘कुछ नहीं’ हो सकता है।
दृश्य 4कुछ धर्मिक चैनलों ने गुरु वसिष्ठ के चेलों और बाबाओं को पकड़ हुआ है जो ग्रहों की स्थिति जांचकर बता रहे हैं कि गुरु वसिष्ठ की मुहूर्त के बारे में गणना क्यों असफल हो गई।
दृश्य 5कुछ कैमरा मैन कैकेयी के कोपभवन के बाहर तक पहुंच गए हैं। बाहर सुरक्षाकर्मी खड़े हैं। दशरथ तक पहुंचना नामुमकिन है।चलिए हम सरकारी प्रवक्ता सुमंत जी से पूछते हैं - सुमंत जी आप तो राजा दशरथ के करीबी हैं, आप बताएं इस समय राजा दशरथ को क्या लग रहा है?सुमंत सोच की मुद्रा बनाते हुए ओर आवाज को गंभीर करते हुए- मेरे विचार से इस समय महाराज को यह लग रहा है कि वे दशरथ क्यों हैं।--और उनके पास बैठी रानी कैकेयी को क्या लग रहा है?-- रानी कैकेयी को लग रहा है, कि वे कैकेयी क्यों हैं?-- और आपको सुमंत जी?- मुझे, ,बहुत सेाचकर, मैं राजा दशरथ और रानी कैकेयी का नजदीकी हूं इसलिए मुझे भी लगना चाहिए कि मैं सुमंत क्यों हूं?देखा आपने यह सनसनी खेज खुलासा, सुमंत तक को पता नहीं है कि वे सुमंत क्यों हैं। मित्राों ऐसे ही दृश्य 5, 6 7 8 आदि आदि अनादि हैं। हरि अनंत हरि कथा अनंता की तरह। मैं उनका वर्णन अभी नहीं कर रहा हूं क्योंकि मुझे पूरा विश्वास है कि उन्हें देखने के बाद आप भी पगला कर कहेंगें कि मुझे लग रहा है कि मैं क्यों हूं।


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नई दुनिया के 19 अक्टूबर,2008 अंक में प्रकाशित

5 टिप्‍पणियां:

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

अरे वाह प्रेम जी

आपने तो ब्रेकिंग न्‍यूज का

कच्‍चा और पक्‍का चिट्ठा

अपने चिट्ठे में खोल कर दिया रख।


एक गाना सुनाई दे रहा है

खूब बज रहा है


मैं ऐसा क्‍यूं हूं

मैं वैसा क्‍यूं हूं

जैसा हूं मैं वैसा क्‍यूं हूं

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बेहतरीन, प्रेम जी.

आपको एवं आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

राम के जमाने में जरूर टेलीविजन रहा होगा। वरना सीता को दुबारा वनवास नहीं जाना पड़ता।

नारदमुनि ने कहा…

aapki kalpna ka to jawab nahi, lekin ye kalpana kisi sikh guru ya kisi muslman ke dharm guru par karo to jane, sri ram to chup chap van ko chale gaye unke bhagat to kuchh bolane wale nahi. is liye likh do jo likhna hai.

राजीव तनेजा ने कहा…

चैनलों की पोल खोलता आपका व्यंग्य ज़बरदस्त है....

बधाई स्वीकारें