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रविवार, 13 मार्च 2016

‘व्यंग्य यात्रा’ अंक 45

‘व्यंग्य यात्रा’ के अंक 45 का प्रकाशन  हो गया है।इस अंक का मुख्य पृष्ठ कुंवर रविंदर की कलाकृतिपर आधारित है। 



इस अंक में आप पढ़ सकते हैं-
पाथेय में- श्रीलाल शुक्ल, रवींद्रनाथ त्यागी, महीप सिंह की रचनाएं। प्रताप सहगल का महीप सिंह पर संस्मरण
चिंतन में- ‘समकालीन यथार्थ और व्यंग्य’ पर गौतम सान्याल, सूरज प्रकाश, सूर्यबाला, प्रेम जनमेजय, लालित्य ललित एवं सुमित प्रताप सिंह तथा निर्मिश ठाकर का व्यंग्यचित्रों एवं रतिलाल बोरीसागर अर्वाचीन गुजराती हास्य व्यंग्य साहित्य पर आलेख। मनोज मोक्षेंद्र का ‘सार्थक व्यंग्य’ पर चिंतन।
मुंबई में हिंदी व्यंग्य का परिदृश्य- के अंतर्गत - करुणाशंकर उपाध्याय, अनंत श्रीमाली एवं सुमितप्रताप सिंह की रपट। यज्ञ शर्मा, सूर्यबाला, अक्षय जैन,घनश्याम अग्रवाल, संजीव निगम, हस्तीमल ‘हस्ती’, कैलाश सेंगर, राजेश विक्रांत, सुभाष काबरा, महेश दुबे, मधुकर गौड़, रोहित शर्मा, सूरज प्रकाश, वागीश सारस्वत, अलका अग्रवाल सिगतिया की व्यंग्य रचनाएं। यज्ञ शर्मा पर विशेष सामग्री कें अंतर्गत - राजेन्द्र सहगल, मधु अरोड़ा, राजेश विक्रांत, दिनेश बावरा, अनंत श्रीमाली एवं सुभाष काबरा। सूर्यबाला के व्यंग्य लेखन पर अरुणेन्द्र नाथ वर्मा का आलेख।
गुजराती व्यंग्य साहित्य के अंतर्गत विनोद भट्ट, निर्मिश ठाकर एवं बोरीलाल सागर की रचनाएं।
त्रिकोणीय में- व्यंग्य उपन्यास ‘अक्कड़-बक्कड़’ पर सुभाष चंदर का आत्मकथ्य। प्रेम जनमेजय, हरीश नवल, सुशील सिद्धार्थ एवं अकबर महफूज के आलेख। ‘अक्कड़-बक्कड़’ का एक अंश।
गद्य व्यंग्य रचनाओं में-शंकर पुणतांबेकर , दिलीप तेतरवे, हरीश नवल, श्रवण कुमार उर्मलिया, किशन लाल शर्मा, निर्मल गुप्त, हरीशकुमार सिंह, सुधा ओम ढींगरा, शम्भु पी. सिंह, नवल जायसवाल , विनोद साव, विश्णु स्वरूप श्रीवास्तव, अशोक मिश्र की रचनाएं।
पद्य व्यंग्य रचनाओं में- दिविक रमेश , ओम वर्मा, संदीप राशिनकर ,श्रीति राशिनकर, मनोकामना सिंह अजय, विज्ञानव्रत, अनिरुद्ध सिन्हा ,दलजीत कौर, कृष्ण कुमार यादव, कुंवर प्रेमिल, सूर्यनारायण गुप्त, मीना अरोड़ा एवं अमृतलाल मदान की रचनाएं।
‘इधर जो मैने पढ़ा’- में ‘मालिश महापुराण’ पर प्रेम जनमेजय, ‘सपनों के सहारे देश’ पर शरद उपाध्याय तथा ‘भूतपूर्व का भूत’ पर अरविंद तिवारी।

1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (14-03-2016) को "एक और ईनाम की बलि" (चर्चा अंक-2281) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'